Lenskart IPO: क्या यह hype ज़्यादा था या timing गलत? पूरी सच्चाई और गहराई से विश्लेषण

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Lenskart IPO की कमजोर listing के पीछे छिपे असली कारण, valuation, profit concerns और future growth की पूरी सच्चाई जानिए इस गहन विश्लेषण में।

मैं Karanveer Singh, पिछले आठ साल से blogging और digital marketing में सक्रिय हूँ। एक blogger के रूप में मैं हमेशा यह समझना चाहता हूँ कि डिजिटल कंपनियाँ कैसे बढ़ती हैं, उनका बिज़नेस मॉडल कैसे काम करता है और कौन से factors उन्हें market में सफल बनाते हैं। Lenskart जैसे brand की growth journey हमेशा मेरे लिए आकर्षण का विषय रही है क्योंकि इस कंपनी ने भारत के eyewear उद्योग को न केवल modern बनाया है बल्कि technology और retail को जोड़कर एक बिल्कुल नया consumer experience तैयार किया है। यही वजह है कि जब Lenskart अपने IPO के साथ शेयर बाज़ार में आने की तैयारी कर रहा था, तो मैं शुरू से इस प्रक्रिया को गहराई से observe कर रहा था।

बीते कुछ महीनों में Lenskart IPO को लेकर इतना buzz था कि कई लोग इसे decade के सबसे anticipated IPOs में से एक बता रहे थे। बाजार में उम्मीदें बहुत ऊँची थीं और लोग यह मानकर चल रहे थे कि Lenskart की listing record-breaking होगी। लेकिन जब Lenskart अंततः शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध हुआ, तो निवेशकों की उम्मीदों के विपरीत कंपनी का शेयर issue price से नीचे खुला। यही मोड़ असली सवाल पैदा करता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि बाजार की भारी उम्मीदें listing के समय होल्ड नहीं कर पाईं। इस ब्लॉग में मैं इसी सवाल की गहराई में जाकर एक व्यापक विश्लेषण कर रहा हूँ।

Lenskart IPO की शुरुआती गिरावट – उम्मीदों और हकीकत के बीच अंतर

शेयर issue price से नीचे क्यों खुला और निवेशक निराश क्यों हुए

Lenskart की इतनी बड़ी ब्रांड वैल्यू और मजबूत consumer connect के बावजूद कंपनी के शेयर ने अपने issue price से नीचे शुरुआत की। यह कदम उस narrative से बिल्कुल उलट था जिसमें मार्केट लगातार इस बात की चर्चा कर रहा था कि Lenskart की मांग इतनी मजबूत है कि listing day पर निवेशकों को तगड़ा premium मिलेगा। लेकिन शेयर शुरुआत से ही दबाव में रहा, जिससे साफ पता चला कि मार्केट के भीतर confidence उतना मजबूत नहीं था जितना social और business buzz से दिख रहा था।

Lenskart जैसी कंपनी से निवेशकों की उम्मीदें हमेशा ऊँची रहती हैं क्योंकि ब्रांड ने अपने क्षेत्र में एक बहतरीन position बनाई है। लेकिन hype और actual numbers के बीच जब बड़ा अंतर हो, तो मार्केट अक्सर उम्मीद के उलट प्रतिक्रिया देता है। IPO की यह फीकी शुरुआत इस बात का संकेत थी कि निवेशक valuation और profitability जैसे मूलभूत पहलुओं पर अधिक ध्यान दे रहे थे, न कि सिर्फ brand popularity पर।

Grey Market Premium का गिरना – Lenskart IPO के लिए पहला संकेत

GMP में भारी उतार-चढ़ाव और निवेशकों की बदलती धारणा

Lenskart IPO के लिए शुरुआती दिनों में Grey Market Premium (GMP) काफी मजबूत था। यह premium इस बात का प्रतीक होता है कि निवेशक issue price से ऊपर कितना भुगतान करने को तैयार हैं। इसी से पता चलता है कि listing पर कितनी demand देखने को मिल सकती है। लेकिन Lenskart के मामले में यह premium listing से पहले लगभग शून्य पर आ गया। यह बदलाव अचानक नहीं था, बल्कि यह मार्केट में valuation को लेकर बढ़ती चिंता का संकेत था।

GMP का कमजोर पड़ना इस बात का स्पष्ट संकेत था कि निवेशक अब Lenskart के शेयर के लिए premium देने के पक्ष में नहीं हैं। यहां यह समझना जरूरी है कि GMP हमेशा accurate prediction नहीं होता, लेकिन यह market sentiment का एक मजबूत संकेत ज़रूर देता है। जब कोई premium धीरे-धीरे zero हो जाए, तो यह मार्केट में excitement के ठंडा पड़ने का संकेत होता है। Lenskart IPO के मामले में भी यही हुआ। यह गिरावट हमें यह समझाती है कि listing day पर शेयर के issue price से ऊपर जाने की संभावनाएँ पहले ही कमजोर हो चुकी थीं।

Lenskart की valuation – क्या यह वास्तव में ज़्यादा थी?

उच्च valuation और मजबूत brands के साथ तुलना

Lenskart की valuation उन प्रमुख कारणों में से एक थी जिसने listing performance को सीधे प्रभावित किया। कंपनी ने जिस valuation पर अपना IPO पेश किया, वह retail और consumer-tech कंपनियों के कई established competitors से भी अधिक थी। जब कोई कंपनी इतनी ऊँची valuation के साथ मार्केट में आती है, तो निवेशक उसी अनुपात में मजबूत financial performance, consistent profits और scalable margins चाहते हैं।

Lenskart की तुलना जब Titan, Trent या Nykaa जैसे ब्रांड्स से की गई, तो यह साफ नज़र आया कि कंपनी का EV/Sales और EV/EBITDA ratio काफी ऊँचा था। यह valuation एक तरह से एक perfect future की कीमत थी। लेकिन मार्केट में perfect valuations हमेशा खतरे के साथ आते हैं, क्योंकि slightest disappointment भी listing performance को कमजोर कर देता है। Lenskart के मामले में भी ऐसा ही हुआ। valuation expectations और actual financial conditions के बीच अंतर ने निवेशकों को सतर्क बना दिया, जिसके परिणामस्वरूप listing कमजोर हुई।

Profitability को लेकर उठते सवाल – क्या growth काफी है?

One-time gains और कमजोर recurring margins

Lenskart की revenue growth शानदार है, इस बात में कोई संदेह नहीं। कंपनी ने लगातार बढ़ते consumer demand, technology adoption और मजबूत retail strategy के चलते sales में अच्छा expansion दिखाया है। लेकिन profitability की बात करें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखती है। कंपनी द्वारा FY25 में दिखाया गया profit आकर्षक लगता है, लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा एक बार मिलने वाले लाभ से जुड़ा था। यह one-time gain Owndays acquisition के दौरान प्राप्त हुआ था, जो recurring profit का हिस्सा नहीं है।

जब इस एक बार मिलने वाले लाभ को हटा दिया जाता है, तो actual profit और margin काफी कम रह जाते हैं। यही वह बिंदु है जिसने investors को concern में डाल दिया। निवेशक revenue growth की सराहना करते हैं, लेकिन अगर margins stable और predictable न हों, तो लंबी अवधि में risk perception बढ़ जाता है। Lenskart का margin profile अभी भी बहुत छोटा है, और इस अंतर को मार्केट ने negative तरीके से लिया।

Market mood और timing – Lenskart के खिलाफ दो बड़ी परिस्थितियाँ

क्यों high-valuation tech कंपनियाँ listing pressure में आती हैं

यह भी समझना जरूरी है कि Lenskart की listing अकेले अपनी वजहों से कमजोर नहीं रही, बल्कि उसके समय की परिस्थितियाँ भी इसके खिलाफ थीं। हाल के महीनों में मार्केट 전체 high valuations पर ट्रेड कर रहा था। ऐसी परिस्थिति में निवेशक risk लेने से बचते हैं और सुरक्षित stocks चुनने की ओर झुकाव रखते हैं। इस कारण tech और digital-economy companies की listings पर दबाव देखा गया।

Lenskart एक digital + retail hybrid है, लेकिन मार्केट ने इसे tech category के साथ ही आंका। ऐसी स्थिति में जब sentiment पहले से cautious हो, तो high valuation वाली companies आसानी से गिरावट का सामना करती हैं। मार्केट mood इस समय defensive stocks की ओर था, जिसने Lenskart जैसे growth-oriented IPO को listing पर प्रभावित किया।

फिर भी Lenskart long-term growth story क्यों माना जाता है

कंपनी की असली ताकत और भविष्य की दिशा

यदि listing दिन को छोड़ दिया जाए, तो Lenskart एक मजबूत कंपनी है और इसके long-term prospects बहुत promising हैं। यह भारत का सबसे बड़ा eyewear retailer है और एशिया में भी इसकी उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। Owndays जैसी acquisition ने इसकी international strategy को और मजबूत किया है। कंपनी का tech-driven supply chain मॉडल इसे traditional retailers के मुकाबले अधिक तेजी से scale करने की क्षमता देता है।

Lenskart का offline और online दोनों चैनलों पर मजबूत control है, जिसकी वजह से company के पास एक unique advantage है। Eyewear sector अभी भी भारत में under-penetrated है, जिसका मतलब है कि demand आने वाले वर्षों में और बढ़ेगी। यदि कंपनी profitability को stable बनाने में सफल होती है, तो Lenskart आने वाले समय में एक बहुत मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।


Conclusion – क्या Lenskart IPO hype से ज़्यादा था? मेरा निष्कर्ष

मेरी नज़र में Lenskart के IPO में hype जरूर बड़ा था, लेकिन hype का मतलब यह नहीं कि कंपनी कमजोर है। असली समस्या valuation और profitability को लेकर बनी उम्मीदों में थी। मार्केट ने बहुत ऊँची valuation पर बहुत जल्दी बहुत ज्यादा उम्मीदें बना लीं। जब actual numbers इन उम्मीदों के अनुरूप नहीं दिखे, तो listing performance कमजोर हो गई। लेकिन यह कहना गलत होगा कि Lenskart की long-term story खत्म हो गई है।

कंपनी की brand strength, network expansion, technology integration और consumer trust इसे long-term growth के लिए मजबूत आधार देते हैं। यदि आने वाले quarters में margins, profits और cost efficiency improve होती है, तो Lenskart अपने lower listing levels से एक बेहतर turnaround दिखा सकता है। निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण यही है कि वे जल्दबाज़ी में कोई फैसला न करें और कंपनी की भविष्य की performance पर ध्यान दें।

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